हिंदी ..!!
कहाँ छिपी हो तुम ?
सुनो ना ..भूली हुई सी आज याद आ रही हो सबको..
टूटे शीशों से वर्तमान के आईने में देखो ज़रा अपना स्वरुप ..
डर नहीं लगता तुम्हे,
ये कैसा वेश है तुम्हारा, ये भयावह चेहरा ..
तुम्हारा अस्तित्व,
गुम गया अपने ही घर में ..
पुनीता से पतीता हो गई हो.
अपने ही समाज में,
तुम भी उन बाँझ स्त्रिओं सी ही हो,
जिन्हें अपनाया तो लक्ष्मी की तरह जाता है..
पर बहिष्कृत किया जाता है फलित ना होने पर ..
परम्परावादी परिपाटी पर चलती तुम,
आखिर बंधवा ही गई कोख अपनी ..
एक दिन में सिमटी हुई तुम भूल गई अपना परिचय ..
खैर. ...
संवेदनाओं में ही सही ,
मुबारक हो तुम्हें..
तुम्हारे ही हिंद देश में ,
तुम्हारे ही हिन्द्वासिओं का ,
तुम्हारा ही दिवस,
"हिंदी दिवस"....
१४. ९. २०१३
........प्रज्ञा .........
चित्र :गूगल से साभार
© Pragya Bahuguna
कहाँ छिपी हो तुम ?
सुनो ना ..भूली हुई सी आज याद आ रही हो सबको..
टूटे शीशों से वर्तमान के आईने में देखो ज़रा अपना स्वरुप ..
डर नहीं लगता तुम्हे,
ये कैसा वेश है तुम्हारा, ये भयावह चेहरा ..
तुम्हारा अस्तित्व,
गुम गया अपने ही घर में ..
पुनीता से पतीता हो गई हो.
अपने ही समाज में,
तुम भी उन बाँझ स्त्रिओं सी ही हो,
जिन्हें अपनाया तो लक्ष्मी की तरह जाता है..
पर बहिष्कृत किया जाता है फलित ना होने पर ..
परम्परावादी परिपाटी पर चलती तुम,
आखिर बंधवा ही गई कोख अपनी ..
एक दिन में सिमटी हुई तुम भूल गई अपना परिचय ..
खैर. ...
संवेदनाओं में ही सही ,
मुबारक हो तुम्हें..
तुम्हारे ही हिंद देश में ,
तुम्हारे ही हिन्द्वासिओं का ,
तुम्हारा ही दिवस,
"हिंदी दिवस"....
१४. ९. २०१३
........प्रज्ञा .........
चित्र :गूगल से साभार
© Pragya Bahuguna
