Friday, 26 July 2013

बस एक पल कभी

चल रहे उन रास्तों पर
मंजिल है अब दूर कहीं
सफर की थकन मिटे
एक पल तो रुको तो कभी..

होश में दुनिया है सारी
महखानों की जाने राजा है क्या
जाम के नशे में तुम
एक पल ढलको तो कभी..

जलती कहीं चिलमनें होंगी
घुंघरुओं की आब तले
दर्द की धुनों में सिसकियाँ
एक पल सुनो तो कभी

ढल रही एक शाम सी
सुबह का आगाज़ लिए
चल पड़ी ये दुनिया भी है
एक पल जियो तो कभी...

बादलों में रुसवा चाँद से
छुप गए हो तुम कहीं
रमज़ान का वास्ता तुम्हे
एक पल दिखो तो कभी...

-जिजीविषा