चल रहे उन रास्तों पर
मंजिल है अब दूर कहीं
सफर की थकन मिटे
एक पल तो रुको तो कभी..
होश में दुनिया है सारी
महखानों की जाने राजा है क्या
जाम के नशे में तुम
एक पल ढलको तो कभी..
जलती कहीं चिलमनें होंगी
घुंघरुओं की आब तले
दर्द की धुनों में सिसकियाँ
एक पल सुनो तो कभी
ढल रही एक शाम सी
सुबह का आगाज़ लिए
चल पड़ी ये दुनिया भी है
एक पल जियो तो कभी...
बादलों में रुसवा चाँद से
छुप गए हो तुम कहीं
रमज़ान का वास्ता तुम्हे
एक पल दिखो तो कभी...
-जिजीविषा
मंजिल है अब दूर कहीं
सफर की थकन मिटे
एक पल तो रुको तो कभी..
होश में दुनिया है सारी
महखानों की जाने राजा है क्या
जाम के नशे में तुम
एक पल ढलको तो कभी..
जलती कहीं चिलमनें होंगी
घुंघरुओं की आब तले
दर्द की धुनों में सिसकियाँ
एक पल सुनो तो कभी
ढल रही एक शाम सी
सुबह का आगाज़ लिए
चल पड़ी ये दुनिया भी है
एक पल जियो तो कभी...
बादलों में रुसवा चाँद से
छुप गए हो तुम कहीं
रमज़ान का वास्ता तुम्हे
एक पल दिखो तो कभी...
-जिजीविषा
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