जिजीविषा
जीवन की खोज में प्रयासरत एक जिजीविषु की अंतरिम अभिव्यक्ति
Monday, 7 July 2014
जीत गई मौत जिंदगी से जंग
वो लड़की,
रिश्तों की कुचली हुई
जिसके गेसुओं में निराशा का अँधियारा था..
जिसे अपनों ने दुत्कारा था
जिसकी हँसीं ने मायूसी का कफ़न ओढ़ लिया था..
जिसका प्रेम ही तो हारा था
जिसकी सुनहरी आँखों में अश्रुओं का सैलाब था..
जिसका न कोई सखा न सहारा था
आखिर बिखर ही गई
शायद जान गई थी कि अधूरे सपने एक बार टूट जाएँ
तो कभी पूरे नहीं होते..
मर गई आत्मा उसकी
फफक पड़ा वो अड़ियलपन..
मौन हर गया
उन साँसों का भारी बोझ
और
जीत गई मौत जिंदगी से जंग..
-जिजीविषा
© Pragya Bahuguna
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